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पूर्णता की तलाश

तीन आधारभूत स्तर ब्रह्मांड को प्रकट करते हैः भौतिक , अभौतिक और कारण संबंधी। यह सभी स्तर उत्तरोत्तर विकास के क्रम में हैं। मनुष्य अस्तित्व के भी तीन स्तर होते हैः स्थूल , सूक्ष्म और कारण। इनमें से एक चेतना को प्रदर्शित करता है। सबसे विकसित अवस्था चेतन स्तर है। मानव अस्तित्व की यह एक दोष रहित अवस्था है। लेकिन जहां अपूर्णता है वहां विकास की गुंजाईश है। अपूर्णता से पूर्णता की ओर जाने के आंदोलन को ही विकास कहते हैं। जो पूर्ण और शाश्वत है , ऐसे श्रेष्ठ या सबसे उत्तमोत्तम स्तर का विकास नहीं हो सकता है। लेकिन इसके अलावा अन्य स्तरों में विकास की गुंजाइश होती है। पांच अवयवों से मिलकर बना मानसिक स्तर वाला स्थूल शरीर ब्रह्मांड को प्रदर्शित करता है। यह जो हमारा शरीर है , वह उस ब्रह्मांड का ही छोटा रूप है , या यों कहें कि यह ब्रह्मांड का ही प्रर्दशन है। हर व्यक्ति का अधिकार है कि उस परमात्मा के ब्रह्मांडीय स्वरूप और उसके आनंद को प्राप्त करे और महसूस करे। भौतिक शरीर अपूर्ण और अस्थायी है। क्योंकि यह समय , स्थान और पहचान से बंधा है। मानव खुद को इन सब बंधनों यानी सापेक्षता से आजाद करने के लिए लगा...

देश बंट गये हैं लेकिन दिलों को क्यूँ बांटते हो?

सुनने की फुर्सत हो तो आवाज़ है इन पत्थरों में, उजड़ी हुई बस्तियों में भी आबादियां बोलती हैं... चिड़ियाँ की चाल में तुफानो से टकराने चलती है , पहुंचे या ना पायें मंजिल, नन्हे पंख फैला उड़ती है| धुंधलका घना हो या साँझ का सुनहरा सा रंग, हौसला दिल में संजोकर, हर बाजी जीत भी लेती है| चातुर्मास यानि जीवन में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण समय, जब बच्चे, बड़े सभी अनुकुलतानुसार गुरु के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण तथा तपाराधना कर जीवन को सफल बनाने के लिए आत्मचिंतन करते हैं|इस वर्ष भी पर्युषण महापर्व में हुए विवाद को भूल जाएँ तो सभी श्रीसंघो में गुरु-भगवंतों की निश्रा में अनुकरणीय व अनुमोदनीय तपस्याएँ व अनुष्ठान हुए| वक्त बीतता गया और आखिर वह वक्त भी आ ही गया, जब जीवन में परिवर्तन लाने वाले चातुर्मास का भी परिवर्तन हो गया| यानि अब उपाश्रय, मन्दिरों में चहल-पहल कम हो जाएगी क्योंकिचातुर्मास परिवर्तन के साथ ही गुरु-भगवंतों का विहार हो गया है| ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि इस चातुर्मास दरम्यान हमने अपने जीवन में क्या-क्या परिवर्तन लाये या अब भी हम पूर्ववत ही हैं और अगले वर्ष फिर से वही...

सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है

चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार नरेंद्रजी मोदी ने काला धन वापस लाने का बड़ा-बड़ा दावा किया था किन्तु अब काला धन वापस ला पाने में मोदी सरकार ने हार मान ली है या वे वादे सिर्फ चुनाव जीतने का माध्यम था? पिछले दिनों काले धन पर सुनवाई के समय अपना पक्ष रखते हुए एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने वही लाचारगी व्यक्त की, जो कभी यूपीए सरकार के एटार्नी जनरल किया करते थे। "हम नाम सार्वजनिक नही कर सकते मीलार्ड।" इससे साफ संदेश है कि सरकार विदेश में काला धन जमा करनेवालों का नाम सार्वजनिक नही कर सकती। काले धन के मुद्दे पर सरकार तो बदली लेकिन बदली हुई सरकार की नीयत नही बदली। अब कांग्रेस बीजेपी हो गयी है और बीजेपी ने कांग्रेस का रूप धारण कर लिया है।  जिस तरह से सरकार ने इस मामले में कानूनी अड़चनों की लीपापोती की है उससे साफ है कि यह सरकार जब नाम सार्वजनिक कर देने की स्थिति मे नही है तो काला धन वापस लाने से तो मीलों दूर हैं। तब तक जनता चाहे तो काले धन की उम्मीद छोड़कर अपनी जेब से बैंकों में धन जमा कराती रहे ताकि मोदी सरकार की जन-धन योजना सफल करे|

क्या हो रही है अच्छे दिनों की शुरुआत?

कई सालों बाद यह एक सपना सा ही लगता है| केन्द्र की मोदी सरकार ने जहां एक तरफ डीजल की कीमतों को बाजार के हवाले करते हुए उसकी कीमतों में तीन रूपये से अधिक की कमी की गई है , वहीं घरेलू गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। साथ ही डायरेक्ट कैश ट्रांसफर योजना को जारी रखने का फैसला करते हुए अहमदाबाद में दस हजार करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली मेट्रो रेल परियोजना की दो लाइनों को भी मंजूरी दे दी गई।                          हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि ये बढ़ी कीमतें ठेकेदार (रिलायंस) को तब तक नही दी जाएंगी जब तक कि वह उत्पादन नही बढ़ाता है और घाटे को पूरा नही करता है। यदि सरकार इसी प्रकार से आम जनता के हित के लिए कार्य करती रही तो अच्छे दिनों का आना निश्चित है|  

34 लच्छवाड के क्षत्रियकुंड तीर्थ से भगवान महावीर की मूल प्रतिमा चोरी होने से जैन समाज में भारी रोष, मूर्ति तलाशने की मांग तेज

मुम्बई/गोडवाड ज्योती: भगवान महावीर की जन्मभूमि लच्छवाड के क्षत्रियकुंड तीर्थ से भगवान महावीर स्वामी की अंदाजित 500 kg वजन की मूल प्रतिमा चोरी होने से महाराष्ट्र के समस्त जैन समाज में भारी रोष व्याप्त है। मुम्बई में बिराजित कई जैनाचार्यों से सलाह के बाद वरिष्ठ विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से बात करके इस दुर्लभ एवं अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतिमा को तत्काल तलाशने व दोषी लोगों को पकड़ने की मांग की है। मान्यता है कि यह प्रतिमा भगवान महावीर के भाई नंदीवर्धन ने भगवान के जीवितकाल में ही स्थापित करवाई थी। जैन धर्म में इसे भगवान महावीर की प्रथम प्रतिमा माना जाता है। विधायक लोढ़ा ने इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बातचीत करके बिहार सरकार से कारवाई तेज करवाने की मांग की है। ज्ञात हो कि बिहार के लच्छवाड़ में स्थित भगवन महावीर स्वामी के जन्मस्थल क्षत्रियकुण्ड में बने 2600 साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर से करीब पांच सौ (500) किलो वजन की महावीर स्वामी की प्रतिमा 26/11/15 की रात चोरी हो गयी थी। कालखंड के हिसाब से अतिप्राचीन ए...

राजस्थान में जर्मन ऑटो मोबाइल कम्पनी बॉश देगी युवाओं को ट्रेनिंग

जयपुर :   हाल ही में संपन्न हुए रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट 2015 में राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम   तथा बॉश कंपनी के द्वारा एमओयू किया गया जिसके तहत   जर्मन ऑटो मोबाइल कम्पनी बॉश राजस्थान में सभी जिला मुख्यालय पर स्थापित 33 राजकीय आईटीआई केन्द्रों पर प्रदेश के करीब 4 हजार युवाओं को प्रशिक्षण देगी। इसके लिए कम्पनी आईटीआई केन्द्रों पर कुल 165 लाख रुपए का निवेश करेगी। कौशल , रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के आयुक्त गौरव गोयल ने बताया कि राज्य में रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए पहली बार जर्मन कंपनी बॉश राज्य में निवेश कर राज्य के 4 हजार युवाओं को सेल्स , रिटेल तथा ऑटोमोबाइल सेक्टर में कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेंगी| 

भिवंडी में आयोजित उपधान तप की मोक्षमाला 19 दिसंबर को

भिवंडी/गोडवाड ज्योती: वैसे तो व्यावसायिक तौर पर भिवंडी पॉवरलूम शहर के नाम से जाना जाता है पर बात अगर धर्म की हो तो यहाँ से अब तक सैकड़ो युवा मुमुक्षुओं ने  दिक्षा लेकर जिनशासन का दीया समस्त जग में प्रज्वलित किया है। यहाँ का धर्ममय वातावरण गुरु-भगवंतो के सानिध्य और पाठशाला के प्रभाव से धार्मिक संस्कार बालवस्था से ऐसे रज-बस जाते हैं कि हर वर्ष यहाँ से दीक्षाऐ सहज हो रही है। पर जिनका पुण्योदय इतना प्रबल नही है, वे मोक्षमाला यानि उपधान तप द्वारा संयम जीवन के रस को चखने का अवसर पाकर प्रफुल्लित हो जाते हैं। ऐसा ही एक अवसर शत्रुंजय धाम-भिवंडी में आयोजित हुआ जहाँ 31 अक्टुम्बर को उपधान प्रवेश में बड़ी संख्या में आराधक जुड़े और भावविभोर होकर तप-जप और अनुष्ठान में लीन होकर प्रभु भक्ति कर रहे हैं। जिन बच्चों को कम समय उपलब्ध था, वे अढारिया में जुड़कर धर्मक्रिया कर रहे है। उपधान की नीवी में तपस्वियों के चेहरे की ख़ुशी देख जो प्रसन्नता मिलती है उसका श्रेय उनके उत्तम भाव, उत्तम व्यवस्था, उत्तम सहयोग,  सभी की सरलता और आचार्य भगवंत के सानिध्य को जाता है| वे स्वयं 2.5 घंटे खड़े होकर तपस्वियों की...