पाली। शहर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में अज्ञात कारणों से आग लग गई। समय रहते दो दमकल की सहायता से आग पर काबू पा लेने से बड़ी घटना होने से टल गई। जानकारी के अनुसार शुक्रवार को इंडस्ट्रीयल एरिया स्थित भैरवा टैक्सटाइल में अज्ञात कारणों से आग लग गई। आगजनी की घटना के बाद फैक्ट्री में कार्य कर रहे मजदूरों में हड़कम्प मच गया। फैक्ट्री में लगी कपड़ा प्रोसेस की मशीन में धुआं उठने के बाद मजदूरों ने अपने स्तर पर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन आग की लपटें अधिक फैलता देख दमकल को सूचित किया। जिस पर दो दमकलों ने मौके पर पहंुच आग पर काबू पा लिया। गनीमत रही कि इस आगजनी घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
बंद फैक्ट्री में कैसे उठा धुआं?
एक तरफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पिछले तीन माह से आदेश के बाद शहर की सभी औद्योगिक इकाइयों में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। उनकी टीम भी समय-समय पर माॅनिटरिंग करने के साथ कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन शुक्रवार को हुई इस आगजनी की घटना से मालूम चलता है कि शहर की आधे से अधिक इकाइयां पूर्व की भांति संचालित हो रही हैं। एनजीटी के आदेशों की पाली के उद्यमी खुलेआम धज्जियां उड़ाकर अपनी फैक्ट्रियों में पूर्व की भांति कामकाज जारी रखे हुए हैं।
चोरी-छिपे कार्य करने के बाद प्रोसेस हुए कपड़े को रात के समय वाहनों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है। इस मामले को नवज्योति ने पिछले दिनों उठाया था, लेकिन बोर्ड ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पाली की इकाइयां बंद हैं तो फिर इनमें धुआं कैसे उठा? जब नवज्योति ने घटना का कवरेज किया तो वहां मजदूर काम कर रहे थे तो कोई कपड़े के थान को एकत्र कर रहे थे। वहीं एक वाहन में माल तैयार होकर बाहर भेजा जा रहा था। लगता है कि इन उद्यमियों को एनजीटी के आदेशों की कोई परवाह नहीं है।
बंद फैक्ट्री में कैसे उठा धुआं?
एक तरफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पिछले तीन माह से आदेश के बाद शहर की सभी औद्योगिक इकाइयों में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। उनकी टीम भी समय-समय पर माॅनिटरिंग करने के साथ कार्रवाई भी कर रही है, लेकिन शुक्रवार को हुई इस आगजनी की घटना से मालूम चलता है कि शहर की आधे से अधिक इकाइयां पूर्व की भांति संचालित हो रही हैं। एनजीटी के आदेशों की पाली के उद्यमी खुलेआम धज्जियां उड़ाकर अपनी फैक्ट्रियों में पूर्व की भांति कामकाज जारी रखे हुए हैं।
चोरी-छिपे कार्य करने के बाद प्रोसेस हुए कपड़े को रात के समय वाहनों के जरिए बाहर भेजा जा रहा है। इस मामले को नवज्योति ने पिछले दिनों उठाया था, लेकिन बोर्ड ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। एक सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पाली की इकाइयां बंद हैं तो फिर इनमें धुआं कैसे उठा? जब नवज्योति ने घटना का कवरेज किया तो वहां मजदूर काम कर रहे थे तो कोई कपड़े के थान को एकत्र कर रहे थे। वहीं एक वाहन में माल तैयार होकर बाहर भेजा जा रहा था। लगता है कि इन उद्यमियों को एनजीटी के आदेशों की कोई परवाह नहीं है।

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