लोकसंतश्री गच्छाधिपती श्रीमद्विजय जयंतसेन सूरीश्र्वर जी म सा जावरा मे भव्य दिक्षा,परिषद शपथ विधी कार्यक्रम,प्रतिष्ठा , जन्मोत्सव व श्री गुरु राजेन्द्रसूरी जयंतसेन विहार धाम के उद्घाटन कार्यक्रम मे निश्रा प्रदान कर *आज सुबह जावरा से विहार कर बडावदा नगर मे* 12 वर्षो बाद भव्य प्रवेश श्रीसंघ मे अपार उत्साह व गच्छाधिपती श्री के हाथो होगी अभिधान राजेन्द्र कोष की स्थापना है। गुरुदेव श्री, मुनिमण्डल व साध्वीमंडल बडावदा से 29 नवम्बर कोविहार कर बर्डिया गोयल नगरे पधारेगे जहॉ पर 29 नवम्बर से 2 दिसम्बर प्रतिष्ठा कार्यक्रम हेतु निश्रा प्रदान करेगे। *बर्डियागोयल गॉव मे 1दिसम्बर को प्रतिष्ठा होगी।* आचार्य श्री बर्डियागोयल गॉव से 2 दिसम्बर को सुबह विहार कर 3 दिसम्बर को पिपलौदा नगर मे भव्य प्रवेश व 5 दिसम्बर को प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम मे निश्रा प्रदान करेगे।ब्रजेश बोहरा नागदा
राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है| कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...

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