चैत्य परिपाटी में लोकसन्तश्री के साथ मुनिमण्डल व साध्वीवृन्द भी शामिल हुए। मार्ग में कई स्थानों पर गुरुभक्तों ने गहूली कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गाजे-बाजे के साथ निकली चैत्य परिपाटी जब कस्तूरबा नगर स्थित श्री नमिनाथ जैन मंदिर पहुंची तो क्षेर्तवासियों ने उत्साह एवं उल्लास के साथ स्वागत किया। लोकसन्तश्री ने आशीर्वचन में दान-धर्म की महत्ता बताई और कहा कि भूतकाल में अनेक पुण्यात्माओं ने अपने गुरु के मार्गदर्शन में दान की नदियां बहाई है। वर्तमान में भी ऐसे ही प्रसंग दिख रहे हैं। धर्म कभी निष्फल नहीं जाता, इसलिए जीवन में हर समय धर्म का भाव रखना चाहिए ।
मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि धर्म का कभी विस्मरण नहीं करना चाहिए। जीवन में व्यक्ति कितना भी आगे बढ़े, लेकिन जिस धर्म के कारण वह आगे बढ़ता है उसे भूलाना नहीं चाहिए। शिखर पर पहुंचाने वाली हजारों सीढिय़ों में पहली सीढ़ी हमेशा याद रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म से विमुख होने वाला कभी सुखी नहीं रहता, इसलिए पुण्यार्जन का कोई अवसर नहीं छोडऩा चाहिए।
काश्यप परिवार का अभिनन्दन -
धर्मसभा में श्री नमिनाथ जैन मंदिर ट्रस्ट ने रतलाम में लोकसन्तश्री का ऐतिहासिक चातुर्मास आयोजित करने पर राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष व विधायक चेतन्य काश्यप परिवार का अभिनन्दन किया। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल सियार, सचिव लोकेश ओस्तवाल, तेजमल कांसवा, राजेन्द्र कोठारी, अशोक कोठारी, संतोष सिसौदिया, प्रवीण डूंगरवाल, अभय मूणत, राजेन्द्र सेठिया, मांगीलाल सियार व प्रमोद रांका ने शॉल, श्रीफल से सिद्धार्थ काश्यप का बहुमान किया। महिला मण्डल अध्यक्ष माणकबेन रांका व सरोज कांसवा ने श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप का सम्मान किया। श्री काश्यप सम्मान के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि लोकसन्तश्री के रतलाम चातुर्मास के लिए समाज ने हमारे परिवार को माध्यम बनाया, इससे नगर के साथ ही हमारे परिवार को भी पुण्यवृद्धि करने का अवसर मिला। गुरुदेव का आशीर्वाद सबके लिए हितकारी होगा।
समय के साथ अपनाएं संयम - मुनिराजश्री
चैत्य परिपाटी के बाद जयन्तसेन धाम में प्रवचन देते हुए मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि समय के साथ संयम को अपनाना आवश्यक है। संयमित जीवनशैली के लिए धर्म का अनुगमन करना पड़ता है। यदि समय पर संयम नहीं सीखा तो समय सबकुछ सीखा देता है। मुनिराजश्री अपूर्वरत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि जीवन की गाड़ी में शुभ भाव का पेट्रोल भरा होना चाहिए। नियमरुपी ब्रेक भी होने चाहिए और धर्मरुपी पहिए रहना आवश्यक है। जीवन की गाड़ी इसी से मोक्ष तक पहुंचेगी। मुनिराजश्री जिनागमरत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि कर्म के सत्य को स्वीकारना सीखो। कर्म ही हर समय जीवों को सुख-दुख का दर्शन व अनुभव करवाते हैं, इसलिए जीवन की हर क्रिया को सोच-समझकर करना चाहिए । प्रवचन के अन्त में दादा गुरुदेव की आरती हुई, इसका लाभ श्रीमती प्रेमलता नरेन्द्र कुमार छाजेड़ ने लिया।
ब्रजेश बोहरा नागदा



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