Skip to main content

देश बंट गये हैं लेकिन दिलों को क्यूँ बांटते हो?


सुनने की फुर्सत हो तो आवाज़ है इन पत्थरों में,
उजड़ी हुई बस्तियों में भी आबादियां बोलती हैं...
चिड़ियाँ की चाल में तुफानो से टकराने चलती है,
पहुंचे या ना पायें मंजिल, नन्हे पंख फैला उड़ती है|
धुंधलका घना हो या साँझ का सुनहरा सा रंग,
हौसला दिल में संजोकर, हर बाजी जीत भी लेती है|

चातुर्मास यानि जीवन में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण समय, जब बच्चे, बड़े सभी अनुकुलतानुसार गुरु के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण तथा तपाराधना कर जीवन को सफल बनाने के लिए आत्मचिंतन करते हैं|इस वर्ष भी पर्युषण महापर्व में हुए विवाद को भूल जाएँ तो सभी श्रीसंघो में गुरु-भगवंतों की निश्रा में अनुकरणीय व अनुमोदनीय तपस्याएँ व अनुष्ठान हुए| वक्त बीतता गया और आखिर वह वक्त भी आ ही गया, जब जीवन में परिवर्तन लाने वाले चातुर्मास का भी परिवर्तन हो गया| यानि अब उपाश्रय, मन्दिरों में चहल-पहल कम हो जाएगी क्योंकिचातुर्मास परिवर्तन के साथ ही गुरु-भगवंतों का विहार हो गया है| ऐसे में मुख्य सवाल यह है कि इस चातुर्मास दरम्यान हमने अपने जीवन में क्या-क्या परिवर्तन लाये या अब भी हम पूर्ववत ही हैं और अगले वर्ष फिर से वहीं से शुरुआत करेंगे, जहाँ से अब तक करते आये हैं यानि मशीनी धर्म क्रियाएं? चार माह तक संतों का सान्निध्य प्राप्त करना ही सौभाग्य नही है बल्कि उनकी वाणी को अपने जीवन में उतारकर आत्मसात करना न सिर्फ स्वयं के लिए बल्कि संतों के लिए भी उल्लेखनीय होता है| उनकी वाणी अपने जीवन में उतारेंगे तो ही हमारेजीवन में सुधार आएगाक्योंकि गुरुका सान्निध्य ही आत्मा से महात्मा और फिर परमात्मा बनाने का एकमात्र पथ है|खैर....ज़िंदगी भगवान की दी हुई एक बहुत बड़ी सौगात है, जिसका कोई आकार-प्रकार, कोई आदि कोई अंत नही है। जहां एक ओर एक ज़िंदगी खत्म हो रही होती है, वहीं दूसरी ओर न जाने कितनी नयी ज़िंदगियाँ जन्म ले रही होती है। ज़िंदगी का दूसरा नाम वक्त भी है, जो किसी के लिए नही रुकता। एक ओर लोग मर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग शादी-विवाह आदि में आडम्बर कर अपना रुतबा दिखाने के लिए पैसा पानी की तरह बहा-बहाकर जश्न माना रहे हैं। दान-धर्म तो बस मिडीया की नजर में आने के लिए हो रहा है| दान-धर्म ही क्यूँ? मिडिया को आकर्षित करने के लिए हर एक सोचा-समझा कदम उठाया जा रहा है| कई मुद्दे हो सकते हैं, जिन पर बात ही नही बल्कि अच्छी खासी बहस की जा सकती है| लेकिनअगरसिर्फ मेरी सोच से इसकी बात करें तो (मैंनही मानती कि मैं इतनी काबिल हूँकि इस विषय पर विस्तार से कुछ लिख पाऊँ लेकिन अगर अपने विचार व्यक्त ना किये तो स्वयं को जवाब दे पाना मुश्किल होगा|)यह मुद्दा इतना भी महत्वपूर्ण नही था, जितना उसे बढ़ा-चढ़ाकर आम जनता के सामने परोसा गया है और जनता भी सियासत की चाल से अनजान उसमें कूद पड़ी|अरे अगर खून में रवानी है तो उसमें उबाल उस वक्त लाओ, जबकोईहमारे सम्पूर्ण देश पर ऊँगली उठाये|एक ओर हम आपस की बातों को मुद्दा बनाकर एक-दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहते हैं और दुसरे लोग निसंदेह इसका फायदा उठाकर आगे चले जाते हैं| जाति-धर्म-आस्था-रिवाजआदि से हटकर बात करें तो धर्म के लिए उत्तर प्रदेश में अखलाक़ की हत्या,धन के लिए रिश्तोंको कलंकित करता शीना हत्याकांड,बाबरी मस्जिद या राम मंदिर, मुंबई बम ब्लास्ट, गुजरात गोधरा, गुलाम अली को हमारे देश में गाने ना देना, गौमाताकोमाँ कहते हैं लेकिन जब वो दूध नही दे पाती तो उसे भूखे मरने औरनाली का कचरा खाने के लिए सड़को पर छोड़ देते हैं|यानि कुल मिलाकर आज भी हमारे देश में मंडल-कमंडल-परिवारवाद सब पर हावी है| देश बंट गये, धर्म बंट गये, परिवार बंट गये, पंथ भी बंट चुके हैं लेकिन दिलों को क्यूँ बांटते हो?क्या इतना बंटाधार (बर्बाद,चौपट) भी कम लगता है?
                    आइये! साथ मिलकर प्रण करें कि हम सहिष्णु बनेंऔरआजाद भारत में विविधता में एकता का प्रमाण दें|क्यूँ किसी में भी सिर्फ बुराई, गलती की खोज करें औरमान लीजिये कि यदि कोई मार्ग भटक भी गया हो तो उसे प्यार से अपना बनाने काप्रयास करें, आखिर सभी हमारे ही हैं| स्वयं का आकलन कर एक आदर्शवादी राष्ट्र बनाने में सहायक हो, सुख मेंना सही पर दुःख में एक-दूसरे के सहभागी बने| हंसिये मत! ये जरा भी मुश्किल नही है|स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़कर बच्चा अमेरिका का राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बन सकता है, बचपन में हकलाकर बोलने वालासुपरस्टार रितिक रोशन बन सकता है तो अगर हम एक हो जाये तो क्या कुछ नही कर सकते?

Comments

Popular posts from this blog

नाडोल में विराजमान है आशाओं को पूर्ण करने वाली कुलदेवी आशापुरा माता

राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी  महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा  माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है|  कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...

शक्ति पीठ नागणेची माता मंदिर-नागाणा धाम में माता का आशीर्वाद प्राप्त करने जुटी श्रद्धालुओं की भीड़

बालोतरा / गोडवाड ज्योती: नवरात्रि शुभारंभ के शुभ अवसर पर बालोतरा उपखंड के प्रसिद्ध शक्ति पीठ नागणेची माता मंदिर-नागाणा के प्रांगण में विधि-विधान के साथ अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना की गयी तथा नव दिवसीय महापूजन का आयोजन किया गया| उल्लेखनीय है कि अखिल राठौड़ वंश की कुलदेवी नागणेची माता के दर्शनों के लिए यूँ तो वर्ष भर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रहती है किन्तु नवरात्रि में यहाँ की रौनक निराली ही होती है| नागाणा धाम के ट्रस्टी उम्मेदसिंह अराबा ने बताया कि प्रकांड ब्राह्मणों के मुखारविंद से मंत्रोच्चार कर घट स्थापना तथा महाआरती में बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने शिरकत कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया| शक्ति पीठ पर सम्पूर्ण भारत भर से आये माता के भक्तों ने पूजा- अर्चना की। मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गयी थी। साथ ही मन्दिर के तीर्थ परिसर के बाहर लगे मेले और सजे हाट बाजार में भी बड़ी तादाद में खरीदारी का लुफ्त उठाया।

34 लच्छवाड के क्षत्रियकुंड तीर्थ से भगवान महावीर की मूल प्रतिमा चोरी होने से जैन समाज में भारी रोष, मूर्ति तलाशने की मांग तेज

मुम्बई/गोडवाड ज्योती: भगवान महावीर की जन्मभूमि लच्छवाड के क्षत्रियकुंड तीर्थ से भगवान महावीर स्वामी की अंदाजित 500 kg वजन की मूल प्रतिमा चोरी होने से महाराष्ट्र के समस्त जैन समाज में भारी रोष व्याप्त है। मुम्बई में बिराजित कई जैनाचार्यों से सलाह के बाद वरिष्ठ विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविद व मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से बात करके इस दुर्लभ एवं अत्यंत महत्वपूर्ण प्रतिमा को तत्काल तलाशने व दोषी लोगों को पकड़ने की मांग की है। मान्यता है कि यह प्रतिमा भगवान महावीर के भाई नंदीवर्धन ने भगवान के जीवितकाल में ही स्थापित करवाई थी। जैन धर्म में इसे भगवान महावीर की प्रथम प्रतिमा माना जाता है। विधायक लोढ़ा ने इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी बातचीत करके बिहार सरकार से कारवाई तेज करवाने की मांग की है। ज्ञात हो कि बिहार के लच्छवाड़ में स्थित भगवन महावीर स्वामी के जन्मस्थल क्षत्रियकुण्ड में बने 2600 साल पुराने ऐतिहासिक मंदिर से करीब पांच सौ (500) किलो वजन की महावीर स्वामी की प्रतिमा 26/11/15 की रात चोरी हो गयी थी। कालखंड के हिसाब से अतिप्राचीन ए...