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सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है


चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार नरेंद्रजी मोदी ने काला धन वापस लाने का बड़ा-बड़ा दावा किया था किन्तु अब काला धन वापस ला पाने में मोदी सरकार ने हार मान ली है या वे वादे सिर्फ चुनाव जीतने का माध्यम था? पिछले दिनों काले धन पर सुनवाई के समय अपना पक्ष रखते हुए एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने वही लाचारगी व्यक्त की, जो कभी यूपीए सरकार के एटार्नी जनरल किया करते थे। "हम नाम सार्वजनिक नही कर सकते मीलार्ड।" इससे साफ संदेश है कि सरकार विदेश में काला धन जमा करनेवालों का नाम सार्वजनिक नही कर सकती। काले धन के मुद्दे पर सरकार तो बदली लेकिन बदली हुई सरकार की नीयत नही बदली। अब कांग्रेस बीजेपी हो गयी है और बीजेपी ने कांग्रेस का रूप धारण कर लिया है। 

जिस तरह से सरकार ने इस मामले में कानूनी अड़चनों की लीपापोती की है उससे साफ है कि यह सरकार जब नाम सार्वजनिक कर देने की स्थिति मे नही है तो काला धन वापस लाने से तो मीलों दूर हैं। तब तक जनता चाहे तो काले धन की उम्मीद छोड़कर अपनी जेब से बैंकों में धन जमा कराती रहे ताकि मोदी सरकार की जन-धन योजना सफल करे|

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