भायंदर/गोडवाड ज्योती: सामाजिक
सांस्कृतिक संगठन युथ फोरम व प्रेरणा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में इंग्लिश
स्पीकिंग कोर्स पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमे राष्ट्रीय आरोग्य एवं सुरक्षा परिषद ने मार्गदर्शन
किया तथा भाषातज्ञ जयश्री
केशव ने इंग्लिश सीखने के आसान तरीकों के बारे में जानकारी दी व कहा कि हिंदी की
तरह अंग्रेजी रोजमर्रा की जिंदगी में व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जरुरी भाषा होते जा
रही है इसलिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान होना बेहद जरुरी है| आज हर तरह के बिल, मोबाइल पर
जानकारी आदि ज्यादातर इंग्लिश में ही होते हैं| पढाई में भी इसका प्रचलन बढ़ता जा
रहा है| अगर हम सोच ले तो पांच दिन में भी इसे सीख सकते हैं| प्रेरणा फाउंडेशन की
पुष्पाजी जैन ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वे इस उपक्रम को ज्यादा से ज्यादा
लोगों तक पहुंचाए| सेमिनार में परिषद के जनसंपर्क अधिकारी हेमंत कोलंबकर, इंग्लिश ट्रेनर
पानेरी पारेख, सोनीका पाटील, काउंसलर फ़रहीन
शेख व उद्धव सावंत ने भी सहयोग दिया| आभार दीपक रमेश जैन ने व्यक्त किया|
राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है| कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...

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