भिवंडी/गोडवाड ज्योती: वैसे तो
व्यावसायिक तौर पर भिवंडी पॉवरलूम शहर के नाम से जाना जाता है पर बात अगर धर्म की
हो तो यहाँ से अब तक सैकड़ो युवा मुमुक्षुओं ने
दिक्षा लेकर जिनशासन का दीया समस्त जग में प्रज्वलित किया है। यहाँ का
धर्ममय वातावरण गुरु-भगवंतो के सानिध्य और पाठशाला के प्रभाव से धार्मिक संस्कार
बालवस्था से ऐसे रज-बस जाते हैं कि हर वर्ष यहाँ से दीक्षाऐ सहज हो रही है। पर
जिनका पुण्योदय इतना प्रबल नही है, वे मोक्षमाला यानि उपधान तप द्वारा संयम जीवन
के रस को चखने का अवसर पाकर प्रफुल्लित हो जाते हैं। ऐसा ही एक अवसर शत्रुंजय धाम-भिवंडी
में आयोजित हुआ जहाँ 31 अक्टुम्बर को उपधान प्रवेश में बड़ी संख्या में आराधक जुड़े
और भावविभोर होकर तप-जप और अनुष्ठान में लीन होकर प्रभु भक्ति कर रहे हैं। जिन बच्चों
को कम समय उपलब्ध था, वे अढारिया में जुड़कर धर्मक्रिया कर रहे है। उपधान की नीवी
में तपस्वियों के चेहरे की ख़ुशी देख जो प्रसन्नता मिलती है उसका श्रेय उनके उत्तम
भाव, उत्तम व्यवस्था, उत्तम सहयोग, सभी की
सरलता और आचार्य भगवंत के सानिध्य को जाता है| वे स्वयं 2.5 घंटे खड़े होकर
तपस्वियों की निवि इत्यादि पर ध्यान दे रहे हैं| इस उपधान का आयोजन आगमोधारक
फाउंडेशन-सूरत की ओर से किया गया है| प.पु. आचार्यश्री पूर्णचंद्रसागर सूरीश्वरजी
म.सा. के मंगलकारी सानिध्य में सभी तपस्वी सुख-शाता में है। इस तप की मोक्षमाला 19
दिसंबर को होने वाली है, जिसकी पूर्व तैयारियां जोर-शोर से प्रारम्भ हो गयी है।
राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है| कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...
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