मुंबई/गोडवाड ज्योती: प.पु. तपागच्छाधिपतिश्री के आजीवन चरणोपासक प.पु. आचार्यश्री विजय कुलचन्द्र सूरीश्वरजी (K.C.) म.सा. की पावन निश्रा में 24/11/16 के शुभ दिवस मुंबई के मलाड में शिखरबंधी नूतन जिनालय एवं गुरुप्रेम के प्रथम गुरुमंदिर का खात मुहूर्त अति भव्यातिभव्य रूप से संपन्न हुआ| इस खात मुहूर्त निमित्त सामुहिक मंत्र-जाप अनुष्ठान का आयोजन भी किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में गुरुभक्तों ने सम्मिलित होकर अपने प्रेम व समर्पण का उत्कृष्ट परिचय दिया|
राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है| कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...

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