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माना की देश कतार में है, लेकिन....

देश बदलने के आसार में है पर देश अब भी कतार में है|
भारत नये सृजनकार में है पर देश अब भी कतार में है|
अफवाह बाजार विस्तार में है पर देश अब भी कतार में है|
ध्वस्त हो रहा किला काले धन का पर देश अब भी कतार में है|
निश्चित ही आएगा नया सवेरा तू अब भी किस विचार में है? 
8 नवंबर की रात महामहिम द्वारा पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट बंद किए जाने एवं नए 2000 के नोटों के चलन से पूरे देश में अव्यवस्था का माहौल दिखाई दिया, जो अब भी जारी है| यहाँ आप यह मत समझना कि मैंने किसी पार्टी को समर्थन दिया है या किसी का विरोध किया है लेकिन बुद्धिजीवी और जिज्ञासु प्रवृति होने से मन में इतना चिन्तन तो निरंतर है कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद हर कोई कह रहा है कि मोदीजी ने अच्छा किया लेकिन.... या इस कदम से देश में निसंदेह बदलाव आएगा लेकिन... या मैं मोदीजी के हर फैसले के साथ हूँ लेकिन...| हर जुमले के बाद लेकिन.... किसी अनजाने-से अंदेशे की ओर इशारा करते हुए भविष्य पर शंकित प्रश्नचिन्ह अंकित करते हैं, जिसका एकमात्र कारण यह है कि आम जनता को उसके मन में उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए कोई नही है| मैं भी उनके नोटबंदी के फैसले का स्वागत करती हूँ लेकिन.... लेकिन यह भी मानती हूँ कि फैसला लेने के पहले पूरी तैयारी करके लोगों को विश्वास में लेना चाहिए था क्योंकि जिस तरह से पैसे जमा करने की कतारें दिख रही हैं, ऐसा लगता है कि सारा काला धन आम जनता के ही पास है| उस पर अब पचास दिनों की मोहलत, तो इतने दिन क्या करें? समुद्र जैसे खर्चो के लिए बूंद-बूंद नोट मिल रहे हैं क्योंकि कभी बैंक में राशि समाप्त हो जाती है तो कभी एटीएम मशीन खराब और जिनके घर में कोई समारोह या कोई अन्य बड़ा खर्चा हो, उनकी तो चर्चा करना ही बेकार है| कुछ सवाल भी हैं कि शुरूआती दौर में केंद्र सरकार काला धन बाहर निकालने पर जोर दे रही थी लेकिन अब नोटबंदी को कैसलेस सोसाइटी बनाने पर जोर दे रहे हैं| अब जिनके पास तकनीक और पैसा है, उन्हें तो शायद कोई फर्क ना पड़े लेकिन जिनके पास तकनीक और पैसा नही है, उनके लिए सरकार कौन-सी योजना बनाएगी? क्योंकि हमें ये नही भूलना चाहिए कि (इसका कारण भले ही कोई भी हो) देश की आर्थिक स्थिति भले ही मजबूत है और वह हर क्षेत्र में सक्षम है लेकिन इस बात से भी इंकार नही किया जा सकता कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लाईट-पानी-अस्पताल आदि मुलभुत सुविधाओं की कमी है| यहाँ तक कि कई आदिवासी क्षेत्रों में बच्चें पढाई से वंचित होने के साथ कुपोषण के शिकार भी हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई बच्चों की मौत भी हो चुकी है और हो रही है| गौर करने वाली बात यह भी है कि आज डिजिटल युग में खुले में शौच जाते है| देश की पवित्र नदी गंगा पापों को धोते-धोते गंदे नाले में परिवर्तित हो चुकी है| आजादी के बाद से अब तक कई घोटाले और दंगों को अंजाम दिया गया, जिसकी सरकार द्वारा जाँच भी की गई लेकिन क्या एक भी नेता जेल गया या घोटाले होने बन्द हो गए? यहाँ तक की भगोड़े भी निश्चिंततापूर्वक मौज कर रहे हैं| 

वैसे जिस तरह यह फैसला अचानक हुआ, उसकी भले ही लोगों या पार्टियों द्वारा आलोचना हुई हो लेकिन यह भी सच है कि बड़े फैसले प्रभावित होने वालों को संभलने का मौका दिए बिना अचानक ही लिए जाते हैं और इस बात का खुलासा माननीय मोदीजी ने अपने वक्तव्य में यह कहते हुए जता भी दिया कि नोटबंदी के इस फैसले विरोध इसलिए नही हो रहा कि हमारी तैयारी नही थी बल्कि विरोध इसलिए हो रहा है कि क्योंकि उन्हें तैयारी का मौका नही मिला| राष्ट्र के नाम अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने यह विश्वास जताया कि इस पूरी प्रक्रिया में देशवासियों को तकलीफ तो होगी लेकिन यदि देश की जनता को भ्रष्टाचार और कुछ दिनों की असुविधा में से चुनाव करना हो तो वे निश्चित ही असुविधा को चुनेंगे| यहाँ यह भी कहना आवश्यक है कि जो विपक्षी पार्टियाँ आज बेहतर कल की आस में खड़ी आम जनता को लाइन में देखकर दुखी होकर सवाल उठा रही है, उन्हें यह जनता कल तक राशन, बस, टिकट, इलाज आदि के लिए लाईन में दिखाई नही दे रही थी? देश की आम जनता की भांति मुझे भी पूरा विश्वास है कि निकट भविष्य में जल्द ही वे सही साबित होंगे क्योंकि आज देश का हर नागरिक परेशानी के बावजूद उनके साथ खड़ा है, जो देश के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करता है क्योंकि अभी महामहिम के तरकश से और तीर निकलने बाकी हैं।







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