बाड़मेर संविदा महिला कर्मचारी के साथ मिल जिला परिषद के एक कार्मिक को ब्लैकमेल करने का सनसनी खेज मामला।।
पुलिस अधीक्षक बाड़मेर संज्ञान ले इस मामले में।।
बाड़मेर बाड़मेर जिला परिषद में संविदा पर लगी एक महिला कार्मिक द्वारा अपने विभागीय कार्मिक के साथ की गयी चेट को आधार बना कुछ कथित ब्लैकमेलरों के साथ मिल कर इस कार्मिक को पिछले चार माह से ब्लैकमेल किया जा रहा।मानसिक अवसाद से गुजर रहे इस कार्मिक ने अपनी इज्जत बचाने के लिए कार्यालय के कुछ सहयोगियों के माध्यम से एक बार महिला कार्मिक को पैसे देकर समझौता भी कर लिया था।मगर दीवाली से चार रोज पूर्व व्हाट्सअप पे एक पूर्व नियोजित सन्देश इन ब्लैकमेलरों द्वारा प्रसारित किया गया कि जिला परिषद का एक अधिकारी सहकर्मी के साथ शोषण ।।जल्द खुलासा ।।दूसरे दिन दो युवक जिला परिषद पहुँचते हे।जिला परिषद कार्यालय को शूट कर वीडियो बनाते हैं।ऑफिस में हड़कम्प मचता हैं। कार्यालय का एक अधिकारी इनको बुला के समझाईस करता हैं।जिनका जवाब होता है लड़की ने बयान दिया हैं। अधिकारी की मध्यस्तता से फिर समझौता होता हैं। दीवाली के 5 दिन बाद फिर इन युवकों द्वारा नरेगा के अधिकारी से इस प्रकरण पर बयान लिया जाता हैं। फिर उनमें से एक युवक इस महिला कार्मिक के साथ कार्यालय से बाहर एकांत में कोई गुफ्तगू करते हैं। पीड़ित कार्मिक का कहना है कि उसको पिछले चार माह से परेशां किया जा रहा है।।उसके द्वारा कोई गलत चेट नही की।सहकर्मिक थी ।सामान्य मेसेज किये तो जवाब दे दिया।।बाकी कोई ऐसी बात नही की शोषण की बात आये।।एक बार पैसा ले गए।।बार बार कहा से दूँ।।इधर नरेगा के अधिकारी सुरेश कुमार दाधीच ने बताया कि खबर करने वालो की मंशा सही नही लगती।।पिछले बीस दिनों से खबर के नाम पर कार्यालय का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा हैं। हमने कार्मिक को बुला के बात की उसके द्वारा कोई गलत हरकत नही की गयी।बल्कि दीवाली से दो रोज पूर्व इस कार्मिक द्वारा सहयोगी कार्मिको को दिवाली के उपहार स्वरूप भेंट भी दी गयी जो इस महिला कार्मिक ने भी ली।।फिर वो शोषण कैसे करता।ये मामला पूर्व नियोजित लगता हैं।।तभी महिला कार्मिक इन लोगो के साथ अब काम कर रही हैं ऐसी सुचना हैं।
उक्त महिला संविदाकर्मी चार माह पूर्व इस मामले की शिकायत करने पुलिस अधीक्षक के पास भी गयी थी ।मगर पुलिस अधीक्षक बहार होने के कारण नही मिले।।लेकिन बाद में चार माह तक सब कुछ ठीक चलता रहा।।फिर अब एकदम प्रताड़ना और शोषण का मामला कैसे पटल पे आया।।कार्मिक सही थी तो वापस पुलिस अधीक्षक से क्यों नही मिली।।घटना की जानकारी क्यों दबाई।।
जिला पुलिस अधीक्षक बाड़मेर को इस पुरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।।ताकि बाड़मेर की शांत आबोहवा में ब्लैकमेलिंग जैसे नासूर पैदा न हो।।
बाड़मेर बाड़मेर जिला परिषद में संविदा पर लगी एक महिला कार्मिक द्वारा अपने विभागीय कार्मिक के साथ की गयी चेट को आधार बना कुछ कथित ब्लैकमेलरों के साथ मिल कर इस कार्मिक को पिछले चार माह से ब्लैकमेल किया जा रहा।मानसिक अवसाद से गुजर रहे इस कार्मिक ने अपनी इज्जत बचाने के लिए कार्यालय के कुछ सहयोगियों के माध्यम से एक बार महिला कार्मिक को पैसे देकर समझौता भी कर लिया था।मगर दीवाली से चार रोज पूर्व व्हाट्सअप पे एक पूर्व नियोजित सन्देश इन ब्लैकमेलरों द्वारा प्रसारित किया गया कि जिला परिषद का एक अधिकारी सहकर्मी के साथ शोषण ।।जल्द खुलासा ।।दूसरे दिन दो युवक जिला परिषद पहुँचते हे।जिला परिषद कार्यालय को शूट कर वीडियो बनाते हैं।ऑफिस में हड़कम्प मचता हैं। कार्यालय का एक अधिकारी इनको बुला के समझाईस करता हैं।जिनका जवाब होता है लड़की ने बयान दिया हैं। अधिकारी की मध्यस्तता से फिर समझौता होता हैं। दीवाली के 5 दिन बाद फिर इन युवकों द्वारा नरेगा के अधिकारी से इस प्रकरण पर बयान लिया जाता हैं। फिर उनमें से एक युवक इस महिला कार्मिक के साथ कार्यालय से बाहर एकांत में कोई गुफ्तगू करते हैं। पीड़ित कार्मिक का कहना है कि उसको पिछले चार माह से परेशां किया जा रहा है।।उसके द्वारा कोई गलत चेट नही की।सहकर्मिक थी ।सामान्य मेसेज किये तो जवाब दे दिया।।बाकी कोई ऐसी बात नही की शोषण की बात आये।।एक बार पैसा ले गए।।बार बार कहा से दूँ।।इधर नरेगा के अधिकारी सुरेश कुमार दाधीच ने बताया कि खबर करने वालो की मंशा सही नही लगती।।पिछले बीस दिनों से खबर के नाम पर कार्यालय का माहौल खराब करने का प्रयास किया जा रहा हैं। हमने कार्मिक को बुला के बात की उसके द्वारा कोई गलत हरकत नही की गयी।बल्कि दीवाली से दो रोज पूर्व इस कार्मिक द्वारा सहयोगी कार्मिको को दिवाली के उपहार स्वरूप भेंट भी दी गयी जो इस महिला कार्मिक ने भी ली।।फिर वो शोषण कैसे करता।ये मामला पूर्व नियोजित लगता हैं।।तभी महिला कार्मिक इन लोगो के साथ अब काम कर रही हैं ऐसी सुचना हैं।
उक्त महिला संविदाकर्मी चार माह पूर्व इस मामले की शिकायत करने पुलिस अधीक्षक के पास भी गयी थी ।मगर पुलिस अधीक्षक बहार होने के कारण नही मिले।।लेकिन बाद में चार माह तक सब कुछ ठीक चलता रहा।।फिर अब एकदम प्रताड़ना और शोषण का मामला कैसे पटल पे आया।।कार्मिक सही थी तो वापस पुलिस अधीक्षक से क्यों नही मिली।।घटना की जानकारी क्यों दबाई।।
जिला पुलिस अधीक्षक बाड़मेर को इस पुरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।।ताकि बाड़मेर की शांत आबोहवा में ब्लैकमेलिंग जैसे नासूर पैदा न हो।।

Comments
Post a Comment