आउटपोस्ट पर पहुंचकर, ये दोनों बीएसएफ की महिला जवान, तुरंत पोजीशन लेते हुए मोर्चा संभाल लेती हैं, जहां से वे पाकिस्तानी रेंजर्स को निशाना बना सकें। इन महिला जवानों को मीडियम मशीनगन और 51mm मोर्टार चलाने की ट्रेनिंग मिली है। अगर पाकिस्तान की ओर से होने वाली फायरिंग से स्थानीय लोगों को और या बीएसएफ के उनके साथियों को कोई नुकसान पहुंचता है, तो ये महिला जवान पाकिस्तान को जवाब देने में कोई रहम नहीं बरततीं।
रबिंदर और अनुबाला उन 90 बीएसएफ महिला जवानों में से हैं जिन्हें जम्मू में 192 किलोमीटर में फैले अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनात किया गया है। जम्मू की रहने वाली रबिंदर के पति ऑस्ट्रेलिया में काम करते हैं। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से रबिंदर ने कहा, 'हम नई नारी शक्ति हैं। हम लोग भी जवाब देंगे और ऐसा जवाब देंगे कि वे 100 साल तक याद रखेंगे कि महिला कॉन्स्टेबल की ताकत क्या होती है।'
बीएसएफ की ज्यादातर महिला सैनिकों की उम्र 23 से 30 साल के बीच है। कुछ महिला जवान अपने परिवार के साथ बटैलियन हेडक्वॉर्टर में रहती हैं और कुछ के बच्चे पति के साथ रहते हैं। ज्यादातर महिला जवान कहती हैं कि बीएसएफ की नौकरी में आने की वजह से घरवाले उन पर गर्व करते हैं। यहां तक कि गांव के पुरुष भी उनकी तारीफ करते हैं। 2008 से बीएसएफ में काम कर रहीं अनुबाला ने कहा, 'पठानकोट में मेरे गांव के बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं मुझे आशीर्वाद देते हैं और कहते हैं कि हमारी बहू ने हमारा नाम रोशन किया है।'
कुछ महिला जवानों को अखनूर, अरनिया और आरएस पुरा जैसे संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। छह से आठ घंटे तक वॉच टावर के अंदर भारी रायफल्स के साथ खड़ी रहने वाली ये महिला जवान पुरुष जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी ड्यूटी कर रही हैं। सांबा में तैनात कॉन्स्टेबल लक्ष्मी कहती हैं,'हम किसी भी तरह के ऐक्शन के लिए तैयार हैं।'

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