रतलाम 3 नवम्बर 16। धरु परिवार ने इस गच्छ (संघ) को आठ रत्न दिए हैं । यह बड़े सौभाग्य की बात है कि पेपराल और समूचा क्षेर्त इससे गौरवान्वित हुआ है। भविष्य में भी किसी को संयम लेने के भाव प्रकट हो तो अनुमति अवश्य देना । इस परिवार का समर्पण भाव सदैव स्मरणीय रहेगा ।
यह बात लोकसन्त, आचार्य व गच्छाधिपति श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने जयन्तसेन धाम में पेपराल के धरु परिवार के साथ आए सौ सदस्यीय दल को संबोधित करते हुए कही। लोकसन्तश्री का जन्म भी इसी कुल में हुआ है । सांसारिक परिवार के सदस्यों को सम्बोधन में लोकसन्तश्री ने सदैव स्नेह और सद्भाव से रहने की प्रेरणा दी और कहा कि यदि परिवार में स्नेह और सद्भाव रहता है तो सदैव शांति बनी रहती है। इससे परिवार की कीर्ति दूर-दूर तक फैलती है। धरु परिवार के मुनिश्री प्रसिद्धरत्न विजयजी एवं मुनिश्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी ने भी विचार रखे। उन्होंने धरु परिवार के सौभाग्य की सराहना की। इससे पूर्व सौ सदस्यीय दल ने लोकसन्तश्री के दर्शन-वन्दन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चातुर्मास आयोजक व राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप परिवार एवं रतलाम श्रीसंघ ने धरु परिवार के सदस्यों का स्वागत-सम्मान किया।
धर्मरथ में बैठने वाला निश्चित मोक्ष पहुंचता है: मुनिराजश्री
मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने लोकसन्तश्री की निश्रा में प्रवचन के दौरान उत्तराध्ययन सूर्त के 23 वें अध्ययन का विवेचन किया । उन्होंने कहा कि अंतर कम हो या ज्यादा, उसे पूरा करने के किसी भी साधन को आवश्यकता तो पड़ती ही है, चाहे वो सायकल हो, गाड़ी हो, ट्रेन हो, जहाज हो या प्लेन हो। इन साधनों का उपयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने गन्तव्य तक पहुंच सकता है। इसी तरह मोक्ष जाने के लिए भी धर्मरथ में बैठना जरुरी है। संसार के साधन दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं लेकिन धर्मरथ में बैठने वाला निश्चित मोक्ष तक अवश्य पहुंचता है। दान-शील-तप-भाव ये चार पहिये धर्मरथ के होते हैं। मनुष्य जीवन पाने वाला ही धर्मरथ में बैठकर मोक्ष तक पहुंच सकता है। मुनिश्री ने कहा कि जो एक आत्मा को जीत लेता है वो चार कषाय, मन एवं पांचों इन्द्रियों को भी जीत लेता है। हजारों को जीतने वाला जब तक कषाय को नहीं जीतता है, तब तक वह हारा हुआ ही माना जाता है। प्रवचन के अन्त में दादा गुरुदेव की आरती का लाभ गिरधारीलाल लेवा रतलाम ने लिया ।
रविवार को आएगी धर्म जागृति यात्रा -
अ.भा. श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् द्वारा संचालित मधुकर संस्कार ज्ञानायतन के बाल श्रावकों द्वारा 1 से 6 नवम्बर तक मध्यप्रदेश के 6 नगरों में धर्म जागृति यात्रा का आयोजन किया गया है । इसके माध्यम से नन्हें बालकों को धर्म संस्कार देने का उद्देश्य है। यह यात्रा क्रमश: जावरा, राणापुर, बडऩगर, खाचरौद, 5 नवम्बर नागदा जंक्शन होकर 6 नवम्बर रविवार को रतलाम आएगी। इस दिन 8 से 25 वर्ष के बालक-बालिका, युवक-युवतियों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।
ज्ञानपंचमी पर विशेष प्रवचन - लोकसन्तश्री की निश्रा में 5 नवम्बर को ज्ञानपंचमी पर्व श्रद्धा से मनेगा । इस अवसर पर सुबह 9.30 बजे जयन्तसेन धाम में ‘ज्ञान बिना अंधियारा’ विषय पर विशेष प्रवचन होंगे। दोपहर. 2.00 बजे देववंदन का आयोजन होंगा।ब्रजेश बोहरा नागदा
यह बात लोकसन्त, आचार्य व गच्छाधिपति श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने जयन्तसेन धाम में पेपराल के धरु परिवार के साथ आए सौ सदस्यीय दल को संबोधित करते हुए कही। लोकसन्तश्री का जन्म भी इसी कुल में हुआ है । सांसारिक परिवार के सदस्यों को सम्बोधन में लोकसन्तश्री ने सदैव स्नेह और सद्भाव से रहने की प्रेरणा दी और कहा कि यदि परिवार में स्नेह और सद्भाव रहता है तो सदैव शांति बनी रहती है। इससे परिवार की कीर्ति दूर-दूर तक फैलती है। धरु परिवार के मुनिश्री प्रसिद्धरत्न विजयजी एवं मुनिश्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी ने भी विचार रखे। उन्होंने धरु परिवार के सौभाग्य की सराहना की। इससे पूर्व सौ सदस्यीय दल ने लोकसन्तश्री के दर्शन-वन्दन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चातुर्मास आयोजक व राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप परिवार एवं रतलाम श्रीसंघ ने धरु परिवार के सदस्यों का स्वागत-सम्मान किया।
धर्मरथ में बैठने वाला निश्चित मोक्ष पहुंचता है: मुनिराजश्री
मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने लोकसन्तश्री की निश्रा में प्रवचन के दौरान उत्तराध्ययन सूर्त के 23 वें अध्ययन का विवेचन किया । उन्होंने कहा कि अंतर कम हो या ज्यादा, उसे पूरा करने के किसी भी साधन को आवश्यकता तो पड़ती ही है, चाहे वो सायकल हो, गाड़ी हो, ट्रेन हो, जहाज हो या प्लेन हो। इन साधनों का उपयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने गन्तव्य तक पहुंच सकता है। इसी तरह मोक्ष जाने के लिए भी धर्मरथ में बैठना जरुरी है। संसार के साधन दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं लेकिन धर्मरथ में बैठने वाला निश्चित मोक्ष तक अवश्य पहुंचता है। दान-शील-तप-भाव ये चार पहिये धर्मरथ के होते हैं। मनुष्य जीवन पाने वाला ही धर्मरथ में बैठकर मोक्ष तक पहुंच सकता है। मुनिश्री ने कहा कि जो एक आत्मा को जीत लेता है वो चार कषाय, मन एवं पांचों इन्द्रियों को भी जीत लेता है। हजारों को जीतने वाला जब तक कषाय को नहीं जीतता है, तब तक वह हारा हुआ ही माना जाता है। प्रवचन के अन्त में दादा गुरुदेव की आरती का लाभ गिरधारीलाल लेवा रतलाम ने लिया ।
रविवार को आएगी धर्म जागृति यात्रा -
अ.भा. श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् द्वारा संचालित मधुकर संस्कार ज्ञानायतन के बाल श्रावकों द्वारा 1 से 6 नवम्बर तक मध्यप्रदेश के 6 नगरों में धर्म जागृति यात्रा का आयोजन किया गया है । इसके माध्यम से नन्हें बालकों को धर्म संस्कार देने का उद्देश्य है। यह यात्रा क्रमश: जावरा, राणापुर, बडऩगर, खाचरौद, 5 नवम्बर नागदा जंक्शन होकर 6 नवम्बर रविवार को रतलाम आएगी। इस दिन 8 से 25 वर्ष के बालक-बालिका, युवक-युवतियों के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।
ज्ञानपंचमी पर विशेष प्रवचन - लोकसन्तश्री की निश्रा में 5 नवम्बर को ज्ञानपंचमी पर्व श्रद्धा से मनेगा । इस अवसर पर सुबह 9.30 बजे जयन्तसेन धाम में ‘ज्ञान बिना अंधियारा’ विषय पर विशेष प्रवचन होंगे। दोपहर. 2.00 बजे देववंदन का आयोजन होंगा।ब्रजेश बोहरा नागदा

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