
स्वर्ग से सुन्दर घर है बनाना तो नारी शक्ति
को बाहर के साथ घर में भी है ध्यान लगाना
नारी शक्ति आगे बढे यही सबकी कामना है,
परिवार का ध्यान रखे यही नारी की साधना है।
बनने को तो मिस इंडिया बन जाये मगर,
लाज, त्याग और समर्पण नारी का गहना है।
आज हर क्षेत्र में सभी यही चाहते है कि महिलाएं आगे बढ़ें और पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करे। यह इस आधुनिक युग की मांग भी है लेकिन लाज, शर्म और सहनशीलता नारी का गहना है। इस खूबसूरती से कुदरत ने उनको नवाज़ा है, फिर क्यूँ कई जगह आज की नारी इस पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर इसकी चकाचौंध में उलझ रही है। इससे समाज में अराजकता बढ़ रही है। कुछ बातों में हमे अपने संस्कारों को भी ध्यान में रखना चाहिए। ये बात तो सदियों से चली आई है कि जब भी औरत ने लक्ष्मण रेखा लांघी है, विनाश ही हुआ है। हमारा पहनावा, हमारी संस्कृति और परिवार का ध्यान रखने के साथ सभी के साथ सौहार्दपूर्ण रहना यही उनका मान और सम्मान है। कुछ जगह आज महिलाएं आगे बढ़ने के चक्कर में ना जाने क्यूँ ऐसे संसाधनों से जुड़ रही हैं, जिसके कारण परिवार में सदैव क्लेश एवं अशांति का माहौल हो गया है। वे अपनी सुख-समृद्धि, मौज-मस्ती और आधुनिक समाज की चकाचौंध में अपने पूरे परिवार से इतनी दूर चली जा रही है कि अपने बच्चों एवं पति के लिये भी समय नही निकाल पाती। हर युग में देश की उन्नति, प्रगति में महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय रहा है। वर्तमान में भी वें निश्चय ही आगे बढ़ें लेकिन इसके साथ अगर घर-परिवार और बच्चों में संस्कार के बीजारोपण करने में अपना ध्यान केंद्रित करें तो इस जहां से उस जहां तक नारी की गौरवगाथा गायी जायेगी।
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