*ध्वजा परिवर्तन कार्यक्रम सम्पन्न* लोकसंत श्री गच्छाधिपती श्रीमद्विजय जयंतसेन सूरीश्र्वर म सा जी के आशीर्वाद से व नागदा मे प पू श्री मनोहरकिर्ती श्री जी म सा की सुशिष्या साध्वी श्री दर्शन प्रभा श्री जी म सा ,साध्वीश्री ज्ञान प्रभा श्री जी म सा व साध्वीश्री चरित्र प्रभा श्री जी म सा आदि ठाणा महिदपुर से विहार कर सुबह शांतीनाथ जिनालय जैन कालोनी नागदा मे पधार कर ध्वजा परिवर्तन कार्यक्रम मे निश्रा प्रदान कर विधी विधान द्वारा आज 26 नवम्बर शनिवार सुबह 8.30 बजे श्रीसंघ नागदा की उपस्थिती मे सहआन्नद ध्वजा परिवर्तन कार्यक्रम सम्पन्न कराई। हेमन्त काकंरिया द्वारा धार्मिक विधी से अष्ठप्कारी पूजा की। ध्वजारोहण के लाभार्थी श्री जे के संघवी जी व संघवी परिवार थाणा की आज्ञा से ब्रजेश बोहरा नागदा ने ध्वजारोहण का लाभ लिया ।श्री शान्तीनाथ भगवान व मंगल दीपक की आरती का लाभ दाखाबाई शान्तीलाल सकलेचा परिवार,श्रीगोतमस्वामी भगवान की आरती का लाभ अभय चौपडा व श्रीगुरुदेव श्री की आरती का लाभ शान्तीलाल चोरडिया ने लिया ।इस कार्यक्रम मे श्री राजेन्द्र सूरि जैन ज्ञान मन्दिर ट्रस्टीगण दिनेश चोरडिया ,निलेश पगारिया, सुरेश नाहटा, मुकेश बोहरा, सुशील सकलेचा ,सुभाष गेलडा श्री संघ नागदा के सदस्य शान्तीलाल बोहरा श्रेणिक लोढा ,भूपेन्द्र लूणावत, विरेऩ्द्र सकलेचा, चन्दशेखर नागदा पकंज लोढा ,बाबुलाल जोधावत, रमेश बोहरा, अशोक, स्वरुपचन्द देवासवाले सहित नवयुवक व महिला परिषद् की अध्यक्ष रंजना लुणावत सहीत सदस्यगण उपस्थित रहे।ब्रजेश बोहरा नागदा
राजस्थान के पाली जिले में नाडोल के शासक परम प्रतापी महाराजा राव लाखणसीजी चौहान द्वारा स्थापित श्री आशापुरा माताजी का पवित्र भव्य तीर्थस्थल है| कई विशाल पौराणिक मंदिरो और ऐतिहासिक विशाल बावडियों और परकोटों की धरोहर को अपनी ओर समेटे देवनगर नाडोल इन बड़े-बड़े विशाल मंदिरो के कारण अपनी विशेष पहचान बनाये हुये है| इतिहास: नाडोल शहर का नगर रक्षक लक्ष्मण हमेशा की तरह अपनी नियमित गश्त पर था। परिक्रमा करते-करते प्यास बुझाने हेतु नगर के बाहर समीप ही बहने वाली भारमली नदी के तट पर जा पहुंचा। पानी पीने के बाद नदी किनारे बसी चरवाहों की बस्ती पर जैसे ही लक्ष्मण ने अपनी सतर्क नजर डाली, एक झोंपड़ी पर हीरों के चमकते प्रकाश ने आकर्षित किया। वह तुरंत झोंपड़ी के पास पहुंचा और वहां रह रहे चरवाहे को बुलाकर प्रकाशित हीरों का राज पूछा। चरवाहा भी प्रकाश देखकर अचंभित हुआ। वस्त्र में हीरे चिपके देख चरवाहे के आश्चर्य की सीमा नही रही, उसे समझ ही नही आया कि जिस वस्त्र को उसने झोपड़ी पर डाला था, उस पर तो जौ के दाने चिपके थे। लक्ष्मण द्वारा पूछने पर चरवाहे ने बताया कि वह पहाड़ी ...

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