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नोटबंदी के बाद सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी में दोगुना हुआ चढ़ावा

मुंबई । कालेधन पर लगाम लगाने के मसकद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ८ नवंबर को ५०० और १००० के पुराने नोट पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया। पीएम मोदी के इस निर्णय से देशभर के धार्मिक स्थलों को बड़ा लाभ हो रहा है। अनेक मंदिरों की दानपेटियां ५०० और १००० के नोटों से लबालब होने लगी है। ऐसी ही खबर मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर की भी है। यहां की दानपेटियों में बाप्पा के भक्तों ने दिल खोलकर ५००-१००० रूपए के पुराने नोटों को चढ़ाया है।

दरअसल ८ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा के बाद पहली बार सिद्धिविनायक मंदिर की दानपेटी में चढ़ाए गए पैसों की गिनती बुधवार सुबह साढ़े दस बजे शुरू की गई जो देर शाम तक चली। दानपेटी खुलने के बाद इसका असर बाप्पा के खजाने में दिखा। दानपेटी में १०, २०, ५० और १०० की नाटों के अलावा ५०० और १००० रुपए के नोटों की गड्डियां बड़ी तादाद में मिली। आमतौर पर एक हफ्ते में सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटियों मेंं ३५ से ४० लाख रुपए की धनराशि चढावे के रूप में जमा होती थी, लेकिन नोटबंदी के बाद यह राशि बढ़कर ६० लाख तक पहुंच गई।

दानपेटी में चढे नोटों की गिनती में १००० रुपए के १०६० नोट मिले जबकि ५०० के ३३४० नोट मिले। यानि ५००-१००० के कुल २७ लाख ६० हजार रूपए चढ़ावे में मिले हैं। वहीं २००० रूपया का नया नोट पहले बाप्पा के चरणों में चढ़ाएं इस श्रद्धा से भक्तों ने २००० रूपए के ९० नोट चढ़ावे में चढ़ाएं हैं। बताया गया है कि मंदिर परिसर में हर जगह लगी इन दान पेटियों में भक्तों द्वारा ५००/१००० रुपए की नोट २४ नवंबर तक चढ़ाई जा सकती है। मंदिर प्रशासन की मानें तो ३० दिसंबर के नजदीक आते-आते मंदिर के खजाने की राशि में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है, जिसमें अधिकतर ५०० और १००० रुपए के नोट हो सकते हैं।

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