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देश-विदेश में सब जगह चर्चित रतलाम चातुर्मास - लोकसन्तश्री काश्यप परिवार ने सेवा-अभिनन्दन समारोह में किया कार्यकर्ताओं का सम्मान

रतलाम 12 नवम्बर । लोकसन्त, आचार्य, गच्छाधिपति, श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने कहा है कि देश-विदेश सभी जगह रतलाम चातुर्मास की चर्चा हो रही है । चातुर्मास के लिए मंगल प्रवेश के बाद उन्होंने जो-जो कल्पनाएं की थी, वे सभी चातुर्मास आयोजक व राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप परिवार व रतलाम श्रीसंघ द्वारा पूरी की गई हैं । इस चातुर्मास से रतलाम का मान बढ़ा है । वे किसी समाज या धर्म के सन्त के रुप में रतलाम नहीं आए थे और अब जाते समय भी हर वर्ग को शुभाशीष देकर जाएंगे । लोकसन्तश्री शनिवार सुबह जयन्तसेन धाम में चातुर्मास आयोजक चेतन्य काश्यप परिवार द्वारा आयोजित सेवा-अभिनन्दन समारोह को संबोधित कर रहे थे। समारोह में चातुर्मास आरम्भ होने के पूर्व से उसे सफल बनाने में लगे कार्यकर्ताओं का बहुमान किया गया। परिवार की ओर से राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप, श्रवण काश्यप, श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप व श्रीमती नीता काश्यप, रतलाम श्रीसंघ के अध्यक्ष डॉ. ओ.सी. जैन, सुशील छाजेड़, परिषद् अध्यक्ष पंकज राठौड ने कार्यकर्ताओं का बहुमान किया। लोकसन्तश्री ने आशीर्वचन में कहा कि चातुर्मास आयोजक परिवार ने रतलाम में चातुर्मास की ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की, इससे जयन्तसेन धाम में आने वाले लाखों व्यक्तियों के मुख पर प्रसन्नता के भाव ही दिखे। उपस्थितजनों से रतलाम चातुर्मास की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए लोकसन्तश्री ने प्रतिदिन या हर रविवार जयन्तसेन धाम आकर धार्मिक क्रियाएं करने का संकल्प लेने का आह्नान किया । सेवा अभिनन्दन समारोह का संचालन सिद्धार्थ काश्यप ने किया।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं का बहुमान -
सेवा अभिनन्दन समारोह में सेवक, राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद्, महिला परिषद्, तरुण परिषद्, बालिका परिषद् के कार्यकर्ता, परिवहन व्यवस्था में सहयोग देने वाले चालकों, परिचालकों, पुजारी, टेंट व्यवस्था, भोजन निर्माण व वितरण, कार्यालय, विद्युत, सुरक्षा, साउण्ड, वीडियो, डिजाईन, कैमरामेन, फोटोग्राफर, मीडिया एवं सोश्यल मीडिया, प्रबंधन व निर्माण, बस व्यवस्था, आवास, भूमि प्रदाता, चिकित्सा व्यवस्था तथा अन्य कार्यों में सहयोग देने वाले सैकड़ों कार्यकर्ताओं का शॉल, माला व स्मृति चिन्ह से बहुमान किया गया ।
धर्म हमें अनुशासन सिखाता है - मुनिराजश्री
इससे पूर्व मुनिराजश्री निपुणरत्न विजयजी म.सा. ने नियमित प्रवचन में कहा कि धर्म हमें अनुशासन सिखाता है । साथ ही हमारे प्रत्येक आचार-विचारों को भी शुद्ध-विशुद्ध बनाने में हमेशा धर्म ही हमें जागृत रखता है । खाना-पीना, चलना-देखना, सुनना-बोलना आदि अनेक क्रियाओं में कैसे नियंत्रण रखना, यह धर्म ही सिखाता है । धर्म का नियंत्रण हमारे इहलोक-परलोक दोनों को सुन्दर बनाता है । जैसे आसमान में उडऩे वाली पतंग डोर के बंधन में रहने पर ऊंचाई तक पहुंचती है, वैसे ही हम धर्म के बंधन में रहकर मोक्ष तक पहुंच सकते हैं । मुनिराजश्री ने कहा कि चातुर्मास में अनेक आराधना करते हुए सभी ने जीवन को धन्य बनाया है, लेकिन अब इस चातुर्मास को अपने जीवन में सदा स्मरणीय बनाने के लिए कुछ त्याग भी करना चाहिए। मासक्षमण का तप करना सहज है लेकिन जीवनभर रात्रि भोजन त्याग करना कठिन है । तप के साथ त्याग का भी संयोग होने पर ही यह चातुर्मास आप सभी के लिए यादगार बन जाएगा । दादा गुरुदेव की आरती का लाभ प्रो. वी.के. जैन परिवार ने लिया। धर्मसभा का संचालन राजकमल जैन ने किया ।
चातुर्मास स्थल परिवर्तन एवं विहार -
लोकसन्तश्री जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. मुनिमण्डल व साध्वीवृन्द के साथ 14 नवम्बर को चातुर्मास स्थल परिवर्तन एवं विहार करेंगे। जयन्तसेन धाम से वे प्रात: 6.00 बजे विहार कर जैन स्कूल पहुंचेंगे। यहां उनकी निश्रा में सेठ कन्हैयालाल काश्यप जैन विद्या भवन के विस्तारीकरण का लोकार्पण समारोह राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष व विधायक चेतन्य काश्यप के मुख्य आतिथ्य में आयोजित होगा। यहां से 8.15 बजे चल समारोह के रुप में लोकसन्तश्री खैरादीवास स्थित नीमवाला उपाश्रय पहुंचेंगे । दर्शन-वन्दन के बाद चल समारोह 9.00 बजे मानव सेवा समिति द्वारा संचालित ब्लड बैंक पहुंचेगा । 9.30 बजे न्यू रोड स्थित सिंधी सनातन धर्म मंदिर (गुरुद्वारा) व तत्पश्चात गुरु सिंघ सभा (सिख गुरुद्वारा) पर जाएंगे । इसके बाद चल समारोह चातुर्मास आयोजक श्री काश्यप के निवास विसाजी मेंशन पहुंचेगा, जहां लोकसन्तश्री आशीर्वचन देंगे। रतलाम से दोपहर 2.00 बजे लोकसन्तश्री का समारोहपूर्वक विहार होगा । उन्हें विहार के दौरान रतलामवासी चल समारोह के रुप में विदाई देने उपस्थित रहेंगे। विसाजी मेंशन से वे विहार कर औद्योगिक क्षेत्र स्थित छाजेड़ प्रिंटर्स प्रा.लि. पहुंचेंगे। यहां वे शाम 4.00 बजे आशीर्वचन देंगे।*ब्रजेश बोहरा नागदा

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