मुंबई/गोडवाड ज्योती: प.पु. गच्छाधिपति राष्ट्रसंत जैनाचार्य श्रीमद विजय
जयंतसेन सुरिश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्तीनी मातृह्र्दया प.पु. साध्वीश्री कोमललताश्रीजी म.सा. का दिनांक 16/10/2015 को राजेंद्रसुरी जैन ज्ञान मंदिर-खेतवाडी में नवकार स्मरण करते हुये समाधीपुर्वक
देवलोकगमन हो गया, जिसकी गुणानुवाद सभा का आयोजन प.पु. मुनिश्री वैभवरत्न विजयजी म.सा., मुनिश्री चंद्रयशविजयजी म.सा., साध्वीश्री शासनलताश्रीजी म.स., साध्वीश्री अनेकांतलताश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में अयोजित की गयी| मुनिश्री वैभवरत्नविजयजी ने कहा कि पुण्यशाली
आत्मा ने सारे सुयोग प्राप्तकर समाधिमरण को प्राप्त किया| मुनिश्री चंद्र्यशविजयजी म.सा. ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि अपने गच्छ
समुदाय में वह प्रवर्तिनी पद पर न होते हुए भी उनके समान थी| उनकी सरलता ह्रदय को छूने वाली थी| साध्वीश्री अनेकांतलताश्रीजी
ने उनकी अप्रमत्त दिनचर्या का वर्णन करते हुए कई प्रसंग बताये| साथ ही आचार्यश्री जयंतसेन
सुरिश्वरजी म.सा., आचार्यश्री प्रद्मुम्नविमल सूरीश्वरजी म.सा., आचार्यश्री जयानंद सूरीश्वरजी म.सा., मुनिश्री जयरत्न विजयजी म.सा., मुनिश्री ऋषभचंद विजयजी म.सा. आदि साधु-साध्वीजी भगवन्तो के संवेदना पत्र
प्राप्त हुए, जो सभा में पढ़कर सुनाये गए|
इस
गुणानुवाद सभा में श्री रमेशजी धरु, श्री मंगल प्रभात लोढ़ा, श्रीमती मंजूजी लोढ़ा, श्री जे.के. संघवी, श्री चम्पकलालजी मोरखिया, श्री मुकेशजी वर्धन आदि ने
श्रध्दांजलि अर्पित करते हुए गुणानुवाद किया| सभा श्री सेवंतीजी मोरखिया, श्री कोलचंदजी मेहता, श्री घेवरचंदजी सेठ, श्री सुरेशजी बाफना, श्री कुंदनमलजी मास्टर, श्री कीर्तिजी पारीख, श्री शांतिजी दैयप, श्री नवीनजी बलु, श्री जयेशजी देसाई, श्री ललितजी अदाणी, श्री प्रवीणजी वोरा, श्री पृथ्वीराजजी कावेडी, श्री मफतजी-नैनवा, श्री सांकलचंदजी संघवी (संघवी ग्रुप), श्री मांगीलालजी, श्री कांतिलालजी-पाथेडी, श्री शेषमलजी-दाधाल आदि कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे|
जीवन सौरभ: जन्म नाम: ज्योतिबेन, पिता: सांकलचंदजी खिवेंसरा, माता: सुनिदेवी, जन्मस्थान: सांथू (जि.जालोर) राजस्थान, दीक्षा: वि.सं.2024, जेष्ठ सुदि 2-सांथू,, दीक्षा गुरु: आचार्य
देवेश श्रीमद विजय विद्याचंद्र सूरीश्वरजी म.सा., गुरुणीजी:
साध्वीश्री लावण्यश्रीजी म.सा., बड़ी दीक्षा: ज्येष्ठ
सुद 15(संवत 2026) सियाणा, दीक्षा पर्याय: 48वर्ष, कालधर्म: 16 अक्टूबर 2015, विहार
भूमि: राजस्थान, म.प्र., तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र
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